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युवा CM ने निभाया युवाओं से किया एक और वादा: उत्तराखण्ड पुलिस भर्ती के लिए तरस गए बेरोजगारों को सीएम पुष्कर सिंह धामी का तोहफा, 1718 पदों पर भर्ती के आदेश जारी

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग शुरू करेगा 1718 पदों जिनमें 1521 सिपाही और 197 दरोगा पदों पर भर्ती

देहरादून: आखिरकार पिछले छह-सात सालों से तरसते प्रदेश के बेरोजगार युवाओं के लिए धामी सरकार ने पुलिस विभाग में भर्ती के दरवाजे खोल दिए हैं। शासन ने सिपाही के 1521 और दरोगा के 197 पदों पर भर्ती की अनुमति दे दी है। इस सम्बंध में उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को जल्द से जल्द ही उत्तराखंड पुलिस भर्ती की विज्ञप्ति जारी करने के आदेश दिए गए हैं।


बीते 4 जुलाई को मुख्यमंत्री का पदभार संभालते ही पुष्कर सिंह धामी ने कहा था कि युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। युवा सीएम ने कहा था कि सरकारी नौकरी के साथ-साथ स्वरोज़गार मुहैया कराकर ही पर्वतीय क्षेत्र से हो रहे पलायन को रोका जा सकता है। सीएम ने सरकार की बागडोर संभालते ही तुरंत विभिन्न सरकारी विभागों में सालों से रिक्त पड़े लगभग 24 हजार पदों पर तेजी से नियुक्ति शुरू करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद अधिकांश विभागों ने अपने यहां रिक्त पदों के सापेक्ष भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है।

अब पुलिस विभाग के रिक्त पदों पर भर्ती के आदेश जारी किए गए हैं। सचिव डा. रंजीत कुमार सिन्हा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि उत्तराखण्ड पुलिस के 1521 आरक्षी पदों और 197 उपनिरीक्षक पदों पर भर्ती का निर्णय शासन ने लिया है। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को इन पदों की भर्ती परीक्षा की विज्ञप्ति जारी करने और परीक्षा कार्यक्रम जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।

ज्ञात हो कि हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘देवभूमि बेरोजगार मंच’ के तहत रोजगार के लिए प्रदर्शन कर रहे युवाओं को आश्वासन दिया था कि अतिशीघ्र पुलिस विभाग में भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। बीते 17 दिसंबर को बेरोजगार युवाओं ने मुख्यमंत्री आवास कूच किया था। इस दौरान अधिकारियों के जरिए हुईनवार्ता में मुख्यमंत्री धामी दो दिन के भीतर पुलिस भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया था, जिसे शनिवार यानी आज पूरा कर दिया गया है।

दरअसल नौकरियों को लेकर भाजपा सरकार लगातार पिछले पौने पांच सालों में निशाने पर रही है और युवा सीएम धामी 2022 के चुनावी दंगल में विपक्ष के हाथों के सबसे बड़े हथियार बनते इस मुद्दे पर बढ़त बनाने की जी-तोड़ कोशिश कर रहे हैं।

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