• Sun. Mar 22nd, 2026

पहाड़ी टोपी और पारंपरिक परिधान मिरजई को खास पहचान दिलाने वाले गोपेश्वर के कैलाश भट्ट का निधन

Bynewsadmin

Mar 15, 2022

पहाड़ी टोपी और पारंपरिक परिधान मिरजई को खास पहचान दिलाने वाले गोपेश्वर के हल्दापानी निवासी लोक के शिल्पी कैलाश भट्ट नहीं रहे।

श्रीमहंत इंदिरेश अस्पताल में ली अंतिम सांस

52-वर्षीय कैलाश पिछले काफी समय से बीमार थे और सोमवार को देहरादून के श्रीमहंत इंदिरेश अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। वह अपने पीछे पत्नी, पुत्र व पुत्री को छोड़ गए हैं। कैलाश जाने-माने रंगकर्मी भी थे। उनके आकस्मिक निधन से लोक संस्कृति से जुड़े लोग स्तब्ध हैं। उन्होंने इसे लोक की अपूरणीय क्षति बताया है।

लुप्त हो रहे मुखौटा को भी लोकप्रियता दी

16 वर्ष की उम्र से पारंपरिक परिधानों के निर्माण का कार्य कर रहे लोक शिल्पी कैलाश भट्ट ने अपने हुनर से मिरजई, झकोटा, आंगड़ी, गाती, घुंघटी, त्यूंखा, ऊनी सलवार, सणकोट, अंगोछा, गमछा, दौंखा, पहाड़ी टोपी, लव्वा जैसे पारंपरिक परिधानों से वर्तमान पीढ़ी को परिचित कराया। कैलाश ने श्री नंदा देवी राजजात की पोशाक ही नहीं, देवनृत्य में प्रयुक्त होने वाले लुप्त हो रहे मुखौटा को भी लोकप्रियता प्रदान की।

असमय चले जाना बेहद पीड़ादायक

लोक के सरोकारों से जुड़े संजय चौहान कहते हैं कि कैलाश जैसे लोकसंस्कृति के पुरोधा का इस तरह असमय चले जाना बेहद पीड़ादायक है। उनके जाने से जो रिक्तता पैदा हुई है, उसकी भरपाई संभव नहीं होगी। उनकी बनाई पहाड़ी टोपी और मिरजई की तो तमाम जानी-मानी हस्तियां प्रशंसक रही हैं। कैलाश रंगकर्म से भी जुड़े रहे और पहाड़ के लोक से जुड़े आयोजनों की वह शान हुआ करते थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *