• Wed. Feb 4th, 2026

आधुनिक युग में मिलेनियल मातृत्व की हकीकत

Bynewsadmin

Jan 16, 2026

लंदन — 2026 के विशाल डिजिटल परिदृश्य में, जहाँ “ट्रेडवाइफ” (पारंपरिक गृहिणी) का सौंदर्य अक्सर पुरानी शैली के फूलों वाले कपड़े पहने, सलीके से सजी-धजी उन महिलाओं से जुड़ा होता है जो बड़े ग्रामीण रसोईघरों में ब्रेड बनाती हैं, वहीं एक नई और अधिक वास्तविक छवि उभर रही है। दक्षिणी इंग्लैंड में रहने वाली 37 वर्षीय फ्रीलांस पेशेवर सारा (परिवर्तित नाम) को अहसास हुआ है कि वह एक ऐसी ज़िंदगी जी रही हैं जिसे उन्होंने कभी स्पष्ट रूप से नहीं चुना था: वह एक “एक्सीडेंटल ट्रेडवाइफ” (इत्तेफाकन गृहिणी) बन गई हैं।

उनका दिन ‘सॉरडो स्टार्टर’ तैयार करने, सिरके से केतली की गहरी सफाई करने और दो साल के बच्चे के व्यस्त कार्यक्रम को संभालने का एक मिला-जुला मिश्रण है—और यह सब वे अपने होम ऑफिस से करियर को बरकरार रखते हुए करती हैं। सारा की कहानी नारीवाद के खिलाफ किसी वैचारिक विद्रोह की नहीं है, बल्कि यह आधुनिक लचीलेपन और मातृत्व की एक विशेष चाहत का परिणाम है।

‘मिलेनियल हाउसवाइफ’ का उदय

कई मिलेनियल महिलाओं के लिए घरेलू जीवन एक विकल्प होना चाहिए था, न कि मजबूरी। हालांकि, “गिग इकोनॉमी” और रिमोट वर्क (घर से काम) के उदय ने पेशेवर और निजी क्षेत्रों के बीच की रेखाओं को धुंधला कर दिया है।

सारा बताती हैं, “मैंने यहाँ पहुँचने की योजना नहीं बनाई थी। मैं एक फ्रीलांसर हूँ जो घर से लचीले घंटों में काम करती हूँ—ऐसा कुछ जो मैंने हमेशा से बच्चों के होने पर करने का सोचा था। मेरे माता-पिता दोनों काम पर जाते थे; मैं चाहती थी कि मैं वह बनूँ जो बच्चों को सोते समय कहानियाँ सुनाए और उन्हें नर्सरी से लेने जाए।”

इस लचीलेपन का एक अनपेक्षित परिणाम “उपलब्धता का पूर्वाग्रह” (availability bias) है। चूँकि वह शारीरिक रूप से घर पर मौजूद होती हैं, इसलिए घरेलू भूमिकाएँ स्वाभाविक रूप से उन्हीं की ओर झुक जाती हैं। चूँकि उन्हें खाना बनाना पसंद है, इसलिए यह तार्किक हो जाता है कि वही भोजन की योजना बनाएँ और साप्ताहिक खरीदारी संभालें।

हमेशा ‘ऑन-कॉल’ रहने की छिपी हुई कीमत

हालाँकि यह जीवनशैली बच्चों के महत्वपूर्ण पड़ावों पर साथ रहने की संतुष्टि देती है, लेकिन यह उन सीमाओं को भी खत्म कर देती है जो एक पारंपरिक 9-से-5 की नौकरी प्रदान करती है। जहाँ उनके पति 50 मील दूर एक दफ्तर में जाकर पितृत्व की जिम्मेदारियों से “लॉग आउट” (मुक्त) हो जाते हैं, वहीं सारा हर समय “ऑन-कॉल” (उपलब्ध) रहती हैं।

वह कहती हैं, “अगर नर्सरी में बच्चे को थोड़ा बुखार भी आता है, तो मेरा पूरा दिन अस्त-व्यस्त हो जाता है।” घर से काम करने वाली माताओं के बीच यह “डिफ़ॉल्ट पेरेंटिंग” एक आम विषय है। मदद करने के इच्छुक पार्टनर होने के बावजूद, दिन के दौरान एक अभिभावक की अनुपस्थिति सारा संकट प्रबंधन का बोझ घर पर मौजूद व्यक्ति पर डाल देती है।

विशेषज्ञ की राय: चुनाव की सूक्ष्मता

मनोवैज्ञानिकों और समाजशास्त्रियों का सुझाव है कि इस जीवनशैली की “आकस्मिक” प्रकृति इसे टिकटॉक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दिखने वाले दिखावटी ट्रेडवाइफ आंदोलन से अलग बनाती है।

लिंग गतिशीलता की विशेषज्ञ समाजशास्त्री डॉ. एलिजाबेथ चेन कहती हैं:

“हम जो देख रहे हैं वह ‘मिडल-वे मदरहुड’ (मध्य-मार्ग मातृत्व) है। ये महिलाएँ कार्यबल को नहीं छोड़ रही हैं; वे करियर और उपस्थिति दोनों को पाने के लिए सिस्टम को अपने तरीके से चलाने की कोशिश कर रही हैं। उन पर ‘ट्रेडवाइफ’ का लेबल अक्सर गलत तरीके से लगाया जाता है। वे किसी विचारधारा की गुलाम नहीं हैं; वे अपने स्वयं के लचीलेपन की शिकार और लाभार्थी दोनों हैं। चुनौती ‘मानसिक बोझ’ (mental load) की है—घर के प्रबंधन का वह अदृश्य श्रम जो आज भी महिलाओं की ओर झुका हुआ है, यहाँ तक कि समान अधिकार वाले रिश्तों में भी।”

अराजकता के बीच संतुष्टि

वैक्यूम करने की झुंझलाहट के बावजूद, सारा को अपने दिनों की इस व्यस्तता में एक गहरी संतुष्टि मिलती है। मंगलवार की दोपहर बच्चे को पार्क ले जाना या खुद पिज्जा का डो (आटा) तैयार करने में रचनात्मकता खोजना उन्हें उद्देश्यपूर्ण लगता है।

दस साल पहले, एक 27 वर्षीय महत्वाकांक्षी मिलेनियल के लिए “गृहिणी” का लेबल पेशेवर शर्मिंदगी का कारण हो सकता था। आज, 37 की उम्र में, लेबल से अधिक जीवन की गुणवत्ता मायने रखती है। सारा कहती हैं, “मैंने अपनी ज़िंदगी वैसे ही डिज़ाइन की है जैसे मैं मातृत्व को देखना चाहती थी। यह सबसे सुखद संतुलन है जो मैं बना सकी।”

‘ट्रेडवाइफ’ परिघटना

“पारंपरिक गृहिणी” या “ट्रेडवाइफ” आंदोलन ने 2020 के दशक की शुरुआत में ज़ोर पकड़ा, जिसकी विशेषता 1950 के दशक की घरेलू शैली की ओर लौटना थी। जहाँ कुछ समर्थक इसे आधुनिक “हसल कल्चर” (भागदौड़ वाली संस्कृति) की अस्वीकृति मानते हैं, वहीं आलोचक इसे महिला अधिकारों के पीछे हटने के रूप में देखते हैं। हालाँकि, “इत्तेफाकन” बनी गृहिणियों के लिए यह जीवनशैली अतीत की ओर लौटने के बजाय एक ऐसे वर्तमान को संभालने के बारे में है जहाँ बच्चों की देखभाल की लागत बढ़ रही है और कार्यस्थल अभी भी पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं।

ब्रिटेन और भारत दोनों में, ‘मानसिक बोझ’ विवाद का विषय बना हुआ है। जैसे-जैसे अधिक महिलाएँ कार्यबल में शामिल हो रही हैं लेकिन घरेलू उम्मीदें स्थिर बनी हुई हैं, “एक्सीडेंटल ट्रेडवाइफ” उन लोगों के लिए एक अस्तित्व तंत्र (survival mechanism) बन गई है जो अपने बच्चों के शुरुआती वर्षों को मिस नहीं करना चाहतीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *