मुंबई – भारतीय फिल्म उद्योग में एक नई बहस छेड़ते हुए, दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर और प्रसिद्ध फिल्म निर्माता प्रकाश झा ने अभिनेताओं और निर्देशकों के बीच बढ़ती दूरी पर अपनी चिंता व्यक्त की है। ‘संकल्प’ फिल्म के प्रचार के दौरान, पाटेकर ने कहा कि अब व्यक्तिगत संबंधों की जगह कॉर्पोरेट और मैनेजरों की दीवार खड़ी हो गई है, जिससे सीधे बातचीत करना लगभग असंभव हो गया है।
सौ लोगों की दीवार
अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाने वाले नाना पाटेकर ने कहा कि पहले के विपरीत, अब किसी बड़े कलाकार तक सीधे पहुंचना मुश्किल है। उन्होंने कहा, “आज किसी स्टार से मिलने के लिए आपको पहले 100 लोगों से मिलना पड़ता है। आप उन्हें स्क्रिप्ट देते हैं और फिर वे आपको निर्देश देते हैं कि फिल्म बनानी चाहिए या नहीं।”
पाटेकर ने खुलासा किया कि प्रकाश झा अक्सर उनसे कहते हैं कि फिल्म उद्योग में अब केवल नाना पाटेकर और अमिताभ बच्चन ही ऐसे हैं जो बिना किसी काम के, केवल हाल-चाल जानने के लिए फोन करते हैं। पाटेकर ने अफसोस जताते हुए कहा कि आज कलाकार और निर्देशक का रिश्ता केवल काम तक सीमित रह गया है।
एंटourage (अमले) का बढ़ता बोझ
प्रकाश झा ने बताया कि अभिनेताओं के साथ रहने वाले 27-28 लोगों के भारी-भरकम अमले (entourage) के कारण फिल्मों का बजट बेवजह बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “आजकल के नए कलाकार, जिनकी एक फिल्म हिट हो जाती है, उनका सपना ही यह होता है कि उनके साथ कितने आदमी चलेंगे। इन सबका खर्च अंततः निर्माता पर पड़ता है।” झा के अनुसार, इसी जटिलता के कारण अब थिएटर के बजाय ओटीटी पर फिल्में रिलीज करना आसान हो गया है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्क्रिप्ट
बातचीत के दौरान जब यह बताया गया कि एक युवा अभिनेता ने स्क्रिप्ट की समीक्षा के लिए ‘ChatGPT’ का इस्तेमाल किया, तो नाना पाटेकर ने अपने मजाकिया अंदाज में कहा, “हमें एआई से ऐसे लोगों के बारे में पूछना चाहिए कि उन्हें थप्पड़ क्यों नहीं मारना चाहिए? इसके 10 कारण बताओ!”
नाना पाटेकर और प्रकाश झा की ये बातें बॉलीवुड के मौजूदा संकट और बदलती कार्य संस्कृति की ओर इशारा करती हैं। उनका मानना है कि अगर फिल्म उद्योग को अपनी वित्तीय चुनौतियों से उबरना है, तो उसे वापस उसी पुराने दौर की सादगी और सीधे रिश्तों की ओर लौटना होगा।
