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PM मोदी के दौरे से पहले PUNJAB CM चन्नी-सिद्धू पहुंचे केदारनाथ: हरदा के साथ चाय पर चर्चा, ‘ऑल इज वेल’ का मैसेज, बाबा केदार से पंजाब की ख़ुशहाली का मांगा आशीर्वाद

देहरादून/ केदारनाथ: छह नवंबर को केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद हो रहे हैं और दिवाली के अगले दिन पांच नवंबर को पीएम नरेन्द्र मोदी बाबा का आशीर्वाद लेने पहुँचेंगे। उससे पहले आज अचानक पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू, प्रभारी हरीश चौधरी, विधानसभा अध्यक्ष केपी राणा केदारनाथ धाम बाबा के दर्शन और पूजा-अर्चना को पहुँचे। मंगलवार सुबह अचानक पंजाब सीएम चन्नी और अध्यक्ष सिद्धू बाकी नेताओं के साथ देहरादून में कांग्रेस के पूर्व सीएम हरीश रावत से मिलने पहुँचे।

रावत के साथ चाय पर चर्चा के बाद पंजाब कांग्रेस के तमाम नेता केदारनाथ रवाना हो गए। ज्ञात हो कि उत्तराखंड चुनाव पर फोकस करने को लेकर हाल में हरीश रावत ने पंजाब कांग्रेस प्रभारी पद छोड़ा है और रावत के आवास पर सिद्धू-चन्नी का तमाम नेताओं के साथ जुटना कई संदेश दे गया है।


एक तरफ जहां कुछ ही दिन पहले हरीश रावत केदारनाथ धाम दर्शन और पूजा-अर्चना करने पहुँचे को उनका तीर्थ-पुरोहितों ने ज़ोरदार स्वागत किया। वहीं, दूसरी तरफ सोमवार को पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को केदारपुरी पहुँचने पर ज़ोरदार विरोध-प्रदर्शन का सामना करना पड़ा और नारेबाज़ी व विरोध के चलते उनको बिना बाबा के दर्शन के बैरंग लौटना पड़ा। जबकि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक और प्रोटोकॉल मंत्री डॉ धन सिंह रावत को भी विरोध झेलना पड़ा।

अब पाँच नवंबर के पीएम मोदी के केदारनाथ दौरे से पहले दो नवंबर को पंजाब कांग्रेस नेताओं ने बाबा के दरबार पहुंचकर आशीर्वाद लिया है। इसके जरिए कांग्रेस यह मैसेज भी देना चाह रही कि सिद्धू और चन्नी में ऑल इज वेल है और पंजाब चुनाव को लेकर कांग्रेस नेता एकजुट हैं। साथ ही कांग्रेस बीजेपी नेताओं को केदारनाथ में विरोध तथा देवस्थानम बोर्ड पर तीर्थ-पुरोहितों के गुस्से को भी नए सिरे से हवा देकर सत्ताधारी दल को असहज कर देना चाह रही है।


दरअसल चारधाम देवस्थानम बोर्ड चुनाव की दहलीज़ पर खड़े उत्तराखंड में बीजेपी के लिए ऐसा मुद्दा बन गया है जिसे न उगलते बन रहा न निगलते। जबकि कांग्रेस लगातार तीर्थ-पुरोहितों के पक्ष में खड़ी होकर सत्ता में आते ही पहली कैबिनेट में देवस्थानम बोर्ड को भंग करने का फैसला लेने का ऐलान कर चुकी है। अब जब पीएम मोदी का दौरा फाइनल हो चुका है, उसी दौरान तीर्थ-पुरोहितों का विरोध जोर पकड़ रहा है। पीएम जहां करोड़ों के पुनर्निमाण कार्यों का उद्घाटन करेंगे, वहीं आदि शंकराचार्य की प्रतिमा का अनावरण भी करेंगे। हालॉकि प्रतिमा की स्थापना की जगह और स्वरूप को लेकर भी कुछ तबक़ों में नाराजगी झलक रही है।


बहरहाल पंजाब कांग्रेस प्रधान सिद्धू और सीएम चन्नी ने केदारनाथ दर्शन कर कई संदेश दे दिए हैं जिनका असर बाइस बैटल पर पड़ सकता है।

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